Home उत्तर प्रदेशतुर्कमान गेट में हिंसा कैसे भड़की? अतिक्रमण हटाने से लेकर पथराव और लाठीचार्ज तक की पूरी कहानी

तुर्कमान गेट में हिंसा कैसे भड़की? अतिक्रमण हटाने से लेकर पथराव और लाठीचार्ज तक की पूरी कहानी

by NewsBoundry
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दिल्ली के पुराने इलाके तुर्कमान गेट में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उस वक्त हिंसक रूप ले गई, जब एक मस्जिद के पास चल रहे नगर निगम के अभियान के दौरान अचानक भीड़ भड़क उठी। यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही थी, लेकिन सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और स्थानीय आक्रोश ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने मंगलवार देर रात तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, करीब 36 हजार वर्गफुट सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था, जिसमें एक बैंक्वेट हॉल, डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन शामिल थे। इन्हें कोर्ट द्वारा अवैध घोषित किया गया था।

कार्रवाई के दौरान अचानक यह अफवाह फैल गई कि मस्जिद को गिराया जा रहा है। यह संदेश सोशल मीडिया के जरिए तेजी से फैला और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।

पथराव और पुलिस की कार्रवाई

अफवाहों के बाद भीड़ उग्र हो गई और एमसीडी कर्मियों व पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इस हिंसा में थाना प्रभारी (SHO) समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बेकाबू होते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए ताकि भीड़ को तितर-बितर किया जा सके।

पुलिस ने मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 25 अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों में काशिफ, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अरीब, अदनान और समीर के नाम सामने आए हैं।

सपा सांसद का नाम आने से बढ़ा राजनीतिक रंग

इस पूरे घटनाक्रम में समाजवादी पार्टी के रामपुर से सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई से कुछ घंटे पहले सांसद तुर्कमान गेट पहुंचे थे और स्थानीय लोगों के साथ बैठक की थी। पुलिस यह जांच कर रही है कि उस बैठक में क्या बातचीत हुई और क्या लोगों को भड़काया गया।

हालांकि, सांसद नदवी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह केवल शांति की अपील करने गए थे और प्रशासन को मस्जिद समिति को पहले समय देना चाहिए था।

सोशल मीडिया ने डाली आग में घी

दिल्ली पुलिस का कहना है कि हिंसा की बड़ी वजह सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक वीडियो और पोस्ट थे। कुछ एडिटेड वीडियो के जरिए यह दावा किया गया कि मस्जिद को तोड़ा जा रहा है, जबकि असल में कार्रवाई मस्जिद के आसपास बने अवैध ढांचों पर हो रही थी।

लाइव वीडियो, फेसबुक पोस्ट, इंस्टाग्राम रील्स और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए लोगों को मौके पर आने के लिए उकसाया गया। पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम अब ऐसे लोगों की पहचान कर रही है जिन्होंने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।

भारी सुरक्षा व्यवस्था, इलाका बना छावनी

घटना के बाद तुर्कमान गेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। करीब 5000 से ज्यादा पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं। कई सड़कों को बंद कर दिया गया और पूरे इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात रहे।

बुधवार को इलाके की अधिकांश दुकानें बंद रहीं और लोग डर के कारण घरों से बाहर नहीं निकले। मस्जिदों में भी नमाज अदा नहीं हो सकी और बड़ी मस्जिद पर ताला लगा रहा।

कानूनी कार्रवाई और प्रशासन की चेतावनी

पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने, बलवा करने, पुलिस पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। सीसीटीवी कैमरों और बॉडी वॉर्न कैमरों की मदद से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

दिल्ली सरकार के गृह मंत्री ने साफ कहा है कि मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है और हिंसा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

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