Home राजनीतिBHIAR ELECTION: BJP की जीत महागठबंधन की पाँच बड़ी गलतियाँ, जिनसे बिहार चुनाव 2025 हाथ से निकल गया

BHIAR ELECTION: BJP की जीत महागठबंधन की पाँच बड़ी गलतियाँ, जिनसे बिहार चुनाव 2025 हाथ से निकल गया

by NewsBoundry
0 comments

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद ईवीएम गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों की चर्चा तेज़ है। लेकिन असली सवाल यह है—महागठबंधन आखिर हारा क्यों? फरवरी से नवंबर तक महागठबंधन ने ऐसे कई फैसले लिए, जिन्होंने खुद ही उनकी राह मुश्किल कर दी। यह रिपोर्ट बताती है कि वे पाँच बड़ी भूलें क्या थीं, जिनसे महागठबंधन लड़ाई में उतरता ही नजर नहीं आया।

  1. फरवरी से ही राहुल गांधी की अलग राह

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने फरवरी से बिहार की चुनावी तैयारी तो शुरू की, लेकिन यह कभी स्पष्ट नहीं किया कि वे महागठबंधन की सामूहिक रणनीति का हिस्सा हैं या किसी स्वतंत्र राजनीतिक योजना पर काम कर रहे हैं।

  • कांग्रेस संगठन में बड़े फेरबदल किए गए।
  • ऐसा लगा जैसे वे RJD के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने वाले नए समीकरण बना रहे हों।
  • प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष बदलने से संदेश गया कि कांग्रेस अपनी राह चल रही है, महागठबंधन की नहीं।

इस शुरुआती असमंजस ने ही साझेदारी की नींव को कमजोर कर दिया।

  1. महागठबंधन की जगहI.N.D.I.A.मॉडल थोपने की कोशिश

2023 में नीतीश कुमार ने जिस I.N.D.I.A. गठबंधन का नेतृत्व किया था, वह 2024 में उनकी वापसी के बाद टूट गया। इसके बावजूद राहुल गांधी ने बिहार में उसी मॉडल को पुनर्जीवित करने की कोशिश की।

  • RJD के नेतृत्व वाले महागठबंधन की जगह राष्ट्रीय स्तर का नया ढाँचा खड़ा करने की कोशिश की गई।
  • कांग्रेस चाहती थी कि नए दल आएं, और वह नेतृत्व की दावेदार बने।

परिणाम यह हुआ कि महागठबंधन की स्थानीय ताकत बिखरी और सीट-स्तर की तैयारियाँ पिछड़ गईं।

 

  1. चुनाव आयोग से लड़ाई में डेढ़ महीना ख़र्च

बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर महागठबंधन ने तीखी आपत्ति जताई।

  • राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने इसे बड़ा मुद्दा बनाकर I.N.D.I.A. को मंच देने की कोशिश की।
  • डेढ़ महीने तक चुनाव आयोग पर आरोप-प्रत्यारोप चले।
  • बाद में कई दावे तथ्य से परे निकले—जिन्हें मृत या गायब बताया गया, वे सूची में सही निकले।

इस पूरे विवाद ने समय, ऊर्जा और जनता का भरोसा—तीनों खर्च करवा दिए।

  1. चुनाव की घोषणा हो गई,पर सीटें ही तय नहीं कर पाए

सबसे बड़ी अव्यवस्था सीट बंटवारे में दिखी।

  • कांग्रेस की 75+ सीटों पर जिद के कारण कई छोटे दल गठबंधन में आ ही नहीं पाए।
  • RJD और कांग्रेस दोनों ने बिना समझौता अंतिम किए ही टिकट बाँटना शुरू कर दिया।
  • नामांकन के बाद तक उम्मीदवारों की सूची बदलती रही।

आंतरिक अराजकता ने कार्यकर्ताओं और वोटरों, दोनों में भ्रम पैदा किया।

  1. सीएम चेहरे पर टकराव और व्यक्तिगत जिद

RJD शुरू से ही तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करता रहा, लेकिन कांग्रेस अंत तक असमंजस में रही।

  • मतदान से कुछ दिन पहले जाकर वह तेजस्वी के नाम पर सहमत हुई।
  • डिप्टी सीएम के लिए मुकेश सहनी का नाम आगे बढ़ाने का फैसला भी विवाद का कारण बना।
  • मुस्लिम वोट बैंक को लेकर असंतोष उभरा कि सत्ता चेहरे तय करने में उनकी भागीदारी नहीं दिख रही।

घोषणापत्र भी कई बार अलग-अलग जारी किए गए—कभी तेजस्वी अकेले, कभी कांग्रेस के साथ।

निष्कर्ष

एनडीए विकास, सेवा और मजबूत संगठन पर चुनाव लड़ता दिखा, लेकिन महागठबंधन आंतरिक मतभेदों, गलत प्राथमिकताओं और असंगठित रणनीति में उलझा रहा। लड़ाई मैदान में कम और गठबंधन के भीतर ज्यादा लड़ी गई।

 

You may also like

Leave a Comment