सऊदी अरब में हुए भीषण बस हादसे में मारे गए भारतीय श्रद्धालुओं के परिजनों की यात्रा और अंतिम संस्कार की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। लगभग 50 परिजन बुधवार को मदीना के लिए रवाना होंगे, जहां मृतकों का अंतिम संस्कार गुरुवार को होने की उम्मीद है।
तेलंगाना और आंध्रप्रदेश सरकारें राहत और समन्वय कार्यों के लिए लगातार सक्रिय हैं। दोनों राज्यों की टीमें सऊदी अरब में मौजूद हैं ताकि परिजनों को सहायता मिल सके और प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।
आंध्रप्रदेश और तेलंगाना की टीमें मौके पर
भारतीय तीर्थ यात्रियों की मदद के लिए आंध्रप्रदेश से एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को सऊदी अरब पहुंचेगा, जिसकी अगुवाई राज्यपाल जस्टिस एस. अब्दुल नज़ीर कर रहे हैं। इसी तरह, तेलंगाना की ओर से अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. अजहरुद्दीन के नेतृत्व में टीम मदीना पहुंच चुकी है, जो अंतिम संस्कार की व्यवस्था और राहत कार्यों में समन्वय कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार, हादसे में कई शव “पहचान से परे जल चुके” हैं, जिन्हें सुरक्षित रखा गया है।
डीएनए मिलान के बाद ही मिलेगा मृत्यु प्रमाण पत्र
सऊदी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मृत्यु प्रमाण पत्र तभी जारी किया जाएगा जब परिजनों के डीएनए सैंपल का मिलान शवों से हो जाएगा।
परिजनों को यात्रा के दौरान डीएनए नमूना देना होगा, और परीक्षण पूरा होने के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही, अधिकारियों ने संकेत दिया है कि सऊदी सरकार मृतकों के परिजनों को मुआवजा भी दे सकती है। तेलंगाना सरकार की ओर से भी सहायता की प्रक्रिया जारी है।
भारतीय मिशन ने मदीना में बनाया कैंप कार्यालय
जेद्दा स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने मदीना के हज तीर्थयात्री कार्यालय में एक कैंपऑफिस स्थापित किया है। यहाँ से परिजनों को दस्तावेज़ी सहायता, समन्वय और आवश्यक प्रक्रियाओं में मदद प्रदान की जा रही है। एक अन्य अपडेट में, महावाणिज्य दूत फहद अहमद खान सूरी ने हादसे के एकमात्र जीवित बचे भारतीय अब्दुल शोएब मोहम्मद से अस्पताल में मुलाकात की। अब्दुल शोएब का इलाज मदीना के अस्पताल में जारी है, और भारतीय मिशन ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
सऊदी में अंतिम संस्कार की तैयारियाँ पूरी
सभी प्रभावित शवों को सुरक्षित रखा गया है और परिजनों के पहुंचने के बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा। भारत और सऊदी अरब दोनों सरकारें राहत, पहचान और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को तेज़ी से और संवेदनशीलता के साथ पूरा करने में जुटी हैं।

