उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में बढ़ती फिजूलखर्ची को रोकने के लिए ग्रामीणों ने एक अहम और सख्त फैसला लिया है। इस फैसले के तहत अब क्षेत्र में महंगे होटलों, पार्कों, फार्म हाउस और अन्य व्यावसायिक स्थलों पर विवाह समारोह आयोजित नहीं किए जाएंगे। इसके साथ ही महिलाओं द्वारा अत्यधिक गहने पहनने पर भी रोक लगा दी गई है।
यह निर्णय खत शिलगांव के पंचरा-भंजरा स्थित महासू देवता मंदिर परिसर में आयोजित एक ग्राम स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और सामाजिक परंपराओं को सादगी के साथ निभाने पर जोर दिया।
गांव और घरों में ही होंगे विवाह समारोह
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि अब शादी-विवाह से जुड़े सभी कार्यक्रम गांव और घरों में ही संपन्न किए जाएंगे। किसी भी प्रकार के महंगे होटल, रिसॉर्ट, पार्क या फार्म हाउस में आयोजन की अनुमति नहीं होगी। ग्रामीणों का मानना है कि दिखावे और अनावश्यक खर्च के कारण आम परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, जिसे रोकना बेहद जरूरी है।
महिलाओं के गहनों पर भी तय की गई सीमा
फैसले के अनुसार विवाह समारोह के दौरान महिलाएं अधिकतम तीन गहने ही पहन सकेंगी। ग्रामीणों का कहना है कि गहनों की होड़ के कारण परिवारों को कर्ज तक लेना पड़ता है, जिससे सामाजिक असमानता भी बढ़ती है। इस नियम का उद्देश्य सादगी को बढ़ावा देना और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा को खत्म करना है।
डीजे, फास्ट फूड और बीयर पर पूर्ण प्रतिबंध
बैठक में यह भी तय किया गया कि शादी और अन्य सामाजिक आयोजनों में डीजे, फास्ट फूड और बीयर जैसे आधुनिक और खर्चीले प्रबंधों पर पूरी तरह से रोक रहेगी। ग्रामीणों ने इसे परंपरागत संस्कृति के विपरीत बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से सामाजिक मूल्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
न्यौता और कन्यादान को लेकर भी नियम तय
ग्रामीणों ने यह भी निर्णय लिया कि पहली शादी में न्यौते के रूप में अधिकतम 100 रुपये ही दिए जाएंगे। वहीं, कन्यादान अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकेगा, लेकिन किसी पर दबाव नहीं डाला जाएगा
नियम तोड़ने पर सख्त सजा
बैठक की अध्यक्षता खत स्याणा तुलसी राम शर्मा ने की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई भी ग्रामीण इन सामूहिक फैसलों का उल्लंघन करता है, तो उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार भी किया जा सकता है।
सामाजिक एकता और सादगी की मिसाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरे समाज की भलाई के लिए लिया गया है। इसका उद्देश्य आर्थिक बोझ को कम करना, सामाजिक समानता बनाए रखना और आने वाली पीढ़ियों को सादगी का संदेश देना है।
जौनसार-बावर क्षेत्र का यह निर्णय अब आसपास के इलाकों के लिए भी एक उदाहरण बनता जा रहा है, जहां लोग फिजूलखर्ची छोड़कर परंपरा और सादगी की ओर लौटने की बात कर रहे हैं।

