Home उत्तराखंडउत्तरकाशी | धराली गांव के आपदा प्रभावित ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना, मुआवजा और पुनर्वास की मांग तेज

उत्तरकाशी | धराली गांव के आपदा प्रभावित ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना, मुआवजा और पुनर्वास की मांग तेज

by NewsBoundry
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उत्तरकाशी जनपद के धराली गांव में आपदा से प्रभावित ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के दिन, जब पूरा देश उत्सव में डूबा हुआ था, उसी समय धराली गांव के ग्रामीण अपने हक और अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर बैठे नजर आए।

ग्रामीणों का कहना है कि आपदा को काफी समय बीत जाने के बावजूद उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की ठोस व्यवस्था की गई है। इसी को लेकर गांव के प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

धरने से पहले ग्रामीणों ने काली कमली क्षेत्र में एकत्र होकर जुलूस और प्रदर्शन को लेकर रणनीति भी तैयार की। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है, जिससे उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

धरने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। मौके पर अपर जिलाधिकारी (एडीएम) और उप जिलाधिकारी (एसडीएम) पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत शुरू की। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उन्हें समाधान का भरोसा दिलाने का प्रयास किया। प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि जिलाधिकारी (डीएम) स्वयं भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे और ग्रामीणों से संवाद करेंगे।

वहीं, धराली गांव के ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उन्हें लिखित और स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में आपदा से हुए नुकसान का सही आकलन, पर्याप्त मुआवजा, सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास और प्रभावित क्षेत्रों का शीघ्र पुनर्निर्माण शामिल है।

फिलहाल धरने के चलते क्षेत्र में तनावपूर्ण लेकिन शांत माहौल बना हुआ है। प्रशासन की निगाहें धरने पर टिकी हुई हैं, जबकि ग्रामीण अपने अधिकारों की लड़ाई को लेकर पूरी तरह एकजुट नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन कब और कैसे ग्रामीणों की मांगों पर ठोस फैसला लेता है।

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