Home उत्तराखंडअंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड बंद, मिला-जुला असर

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड बंद, मिला-जुला असर

सिटिंग जज की निगरानी में CBI जांच की मांग पर अड़े विपक्ष और सामाजिक संगठन

by NewsBoundry
0 comments

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूरे उत्तराखंड में आज विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के आह्वान पर उत्तराखंड बंद रखा गया। बंद का प्रदेशभर में मिला-जुला असर देखने को मिला। कई शहरों और कस्बों में सुबह से ही बाजार बंद रहे और कुछ जगहों पर वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन चलता रहा।

यह बंद अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में CBI से कराए जाने की मांग को लेकर किया गया है। विपक्षी दलों और संगठनों का कहना है कि जब तक जांच पूरी तरह निष्पक्ष और न्यायिक निगरानी में नहीं होती, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी, खासकर मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर।

सरकार द्वारा CBI जांच की संस्तुति किए जाने के बावजूद आंदोलनकारी संगठन संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि केवल CBI जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जांच किन बिंदुओं पर होगी और क्या उसमें प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी।

विपक्ष का सरकार पर हमला

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता और सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आम जनता से बंद को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए और किसी को भी कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए।

महिला संगठनों की भी आवाज

महिला मंच की संयोजक कमला पंत ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि CBI जांच के दायरे और शर्तें स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी जांच होनी चाहिए जिससे यह साफ हो सके कि आखिर वीआईपी कौन है और उसकी भूमिका क्या रही। उनके अनुसार यह लड़ाई सिर्फ अंकिता के लिए नहीं, बल्कि राज्य की सभी बेटियों के सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई है।

सामाजिक संगठनों का समर्थन

मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि अंकिता की हत्या को केवल एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। यह घटना पूरे उत्तराखंड के स्वाभिमान पर हमला है। उन्होंने कहा कि जब तक सिटिंग जज की निगरानी में CBI जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

विभिन्न संगठनों ने एक स्वर में कहा कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में नहीं कराई जाती। सभी संगठनों ने जनता से अपील की कि वे उत्तराखंड बंद को सफल बनाने में जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ अपनी भूमिका निभाएं।

उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने भी बंद को समर्थन दिया है। कुल मिलाकर, बंद का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग दिखा, लेकिन आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

You may also like

Leave a Comment