Home उत्तराखंडबदरीनाथ धाम के कपाट आज शीतकाल के लिए बंद होंगे, दस क्विंटल फूलों से सजा मंदिर; पाँच हजार श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद

बदरीनाथ धाम के कपाट आज शीतकाल के लिए बंद होंगे, दस क्विंटल फूलों से सजा मंदिर; पाँच हजार श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद

by NewsBoundry
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधामों में से एक बदरीनाथ धाम के कपाट आज दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर शीतकाल हेतु बंद किए जाएंगे। इसके साथ ही छह महीने की शीतकालीन अवधि के दौरान भगवान बदरीनाथ की पूजा-अर्चना पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बद्री मंदिर में संपन्न होगी।

दस क्विंटल फूलों से सजा धाम

कपाट बंद किए जाने के पावन अवसर पर बदरीनाथ मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। मंदिर परिसर को करीब दस क्विंटल ताजे फूलों से अलंकृत किया गया, जिससे पूरा धाम दिव्य और उत्सवमय माहौल से भर उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विशेष क्षण के साक्षी बनने के लिए बदरीनाथ पहुंच रहे हैं।

पंच पूजाओं का समापन

21 नवंबर से शुरू हुई पंच पूजाओं की श्रृंखला सोमवार को विशेष अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुई। माता लक्ष्मी मंदिर में कढ़ाई भोग और विशेष पूजा का आयोजन किया गया।
बदरीनाथ के मुख्य पुजारी (रावल) अमरनाथ नंबूदरी ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ माता लक्ष्मी को गर्भगृह में विराजमान होने के लिए आमंत्रित किया। परंपरा के अनुसार, कपाट खुलने के बाद लगभग छह महीने तक माता लक्ष्मी परिक्रमा स्थल स्थित लक्ष्मी मंदिर में विराजमान रहती हैं और शीतकाल की अवधि में वे वापस गर्भगृह में प्रतिष्ठित होती हैं।

शीतकालीन पूजा स्थलों में शुरू होंगी आराधनाएँ

चारधामों के शीतकालीन पूजा स्थलों में भी पूजा-अर्चना शुरू की जाएगी—

  • केदारनाथ की पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होगी।

  • बदरीनाथ की पूजा पांडुकेश्वर के योगध्यान बद्री मंदिर में संपन्न होगी।

  • गंगोत्री की पूजा मुखबा गांव में होगी।

  • यमुनोत्री की पूजा खरसाली में की जाएगी।

श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

कपाट बंद होने के इस वार्षिक समारोह में देशभर के श्रद्धालुओं का भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि मंगलवार को कपाट बंद होने के समय 5,000 से अधिक श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचेंगे। सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर स्थानीय प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है।

वेद-ऋचाओं के वाचन का भी हुआ समापन

गणेश मंदिर, आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल के कपाट बंद होने के बाद मंदिर परिसर में वेद-ऋचाओं का वाचन भी परंपरा के अनुसार बंद कर दिया गया। इसके साथ ही बदरीनाथ धाम का आधिकारिक शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है।

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