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उत्तराखंड: तीर्थनगरी में किन्नरों की बधाई राशि तय, 2100 रुपये से अधिक नहीं ले सकेंगे

by NewsBoundry
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उत्तराखंड की तीर्थनगरी में अब शादी, बच्चे के जन्म और अन्य खुशी के अवसरों पर किन्नरों द्वारा ली जाने वाली बधाई राशि को लेकर नया नियम लागू किया गया है। नगर निगम की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए तय किया गया कि किन्नर किसी भी शुभ अवसर पर 2100 रुपये से अधिक की बधाई राशि नहीं ले सकेंगे।

नगर निगम बैठक में लिया गया फैसला

नगर निगम की बैठक मंगलवार सुबह शुरू हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान पार्षद अभिनव सिंह मलिक ने किन्नरों की बधाई राशि तय करने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव में कहा गया कि कई बार किन्नर शादी-ब्याह, बच्चे के जन्म या अन्य पारिवारिक आयोजनों में लोगों से मनमानी रकम की मांग करते हैं। प्रस्ताव के अनुसार जब लोग उनकी मांग पूरी नहीं कर पाते तो कई जगह विवाद, हंगामा और मारपीट जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। इसी समस्या को देखते हुए 2100 रुपये की अधिकतम सीमा तय करने का निर्णय लिया गया। बैठक में मौजूद सभी पार्षदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

लोगों को राहत मिलने की उम्मीद

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवार आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद दबाव में बड़ी रकम देने को मजबूर हो जाते थे। नए फैसले से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। नगर निगम का मानना है कि इससे अनावश्यक विवाद और तनाव की घटनाओं में कमी आएगी।

पार्षदों के भत्ते पर भी बनी सहमति

बैठक में पार्षदों को दिए जाने वाले भत्ते के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। नगर निगम प्रशासन ने बताया कि भत्ते से संबंधित फाइल जल्द शासन को भेजी जाएगी। शासन से अनुमति मिलने के बाद पार्षदों को भत्ता मिलना शुरू हो सकेगा।

बैठक में दिखा विरोध

नगर निगम की बैठक के दौरान कुछ समय के लिए हंगामे जैसी स्थिति भी बनी। कुछ पार्षदों ने आरोप लगाया कि बैठक में सभी 40 पार्षदों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी। इस कारण कुछ पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। बाद में नगर आयुक्त के समझाने और अतिरिक्त फर्नीचर मंगाने के बाद पार्षद बैठक में शामिल हुए।

वेंडरों को भेजे गए नोटिस का विरोध

बैठक में सीमा डेंटल क्षेत्र के वेंडरों से तहबाजारी शुल्क वसूलने का मुद्दा भी उठा। पार्षद लव कांबोज ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने 44 वेंडरों को एकमुश्त 21-21 हजार रुपये जमा करने के नोटिस भेज दिए हैं, जो उनके लिए भारी रकम है। उन्होंने कहा कि नगर निगम को समय-समय पर शुल्क वसूलना चाहिए था। वेंडर इतनी बड़ी रकम एक साथ देने में सक्षम नहीं हैं। पार्षद ने यह भी कहा कि अप्रैल 2026 से सभी वेंडर नियमित रूप से तहबाजारी शुल्क जमा कर रहे हैं।

शहर की समस्याओं पर भी हुई चर्चा

बैठक में पार्षदों ने शहर की अन्य समस्याओं को भी उठाया। इसमें आवारा पशुओं को गौशाला में शिफ्ट करने, आवारा कुत्तों से लोगों को हो रही परेशानी, खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक कराने और सड़कों की हालत सुधारने जैसी मांगें शामिल रहीं। नगर निगम प्रशासन ने सभी मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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